भाजपा IT-सेल एक्सपोज़, कहीं आप भी तो चंगुल में नहीं???
भाजपा IT-CELL का काला सच 2012 में IT-सेल का गठन होता है। उस वक़्त ठीक से लोगों कर हाथ में न इंटरनेट पहुंचा था और न ही बड़े महंगे मोबाइल। उस समय भाजपा के एक नेता अपनी इमेज बिल्डिंग के लिए ये करना शुरू करते हैं। सोशल मीडिया जो अब तक मनोरंजन के लिए यूज़ हो रहा था, अचानक उसका दुरुपयोग शुरू होता है। आते-आते 2014 में ऐसी स्थिति आती है जब नेता मोदी अपनी पार्टी से बड़ा हो जाता है। और चूंकि उसकी पहुँच बढ़ चुकी है, और वो कोई भी मैसेज वायरल करने में सक्षम है तो वो दबाव बनाता है। पार्टी उसके कदमों पर नतमस्तक हो जाती है, आडवाणी, जोशी और गडकरी जैसे नेता दरकिनार कर दिए जाते हैं। 2012 से 2014 के बीच सोशल मीडिया के माध्यम से झूठ फैला के ऐसे लोगों की फौज तैयार कर दी जाती है, जो अपने आका को ही सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। इसके सबसे ज्यादा शिकार सवर्ण हैं , क्योंकि भाजपा सवर्ण पार्टी के रूप में जानी जाती रही है, अब चूंकि वो जुड़े पहले थे, तो उन्हें मैसेज भी पहले मिल जाते हैं। यही वजह है कि जब सवर्ण विरोध पर उतरते हैं, तो IT-सेल कमजोर पड़ जाता है। जिन्हें लगता है कि अगर मोदी प्रधानमंत्री (चौकीदार कहिए) न ब...