विकास पाल की रचना
इन लोगों को वोट की कीमत नहीं मालूम,
धोखे में हैं ये, इनको असलियत नहीं मालूम,
वोटों के बदले उनसे उम्मीदें मत रखो,
नादान! तुम्हें उनकी असलियत नहीं मालूम,
नेता जी भाषण में प्रेम का दावा करते हैं,
उन जईफों से जिनकी सूरत नहीं मालूम,
चुनाव जीत गए न सोचो कि फिर आयेंगे,
क्या तुम्हें भी उनकी फितरत नहीं मालूम,
पिछले सत्तर सालों से मेरे इस मुल्क में हैं,
जनतन्त्र या षड्यंत्र की हुकूमत नहीं मालूम|
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साभार- विकास पाल
धोखे में हैं ये, इनको असलियत नहीं मालूम,
वोटों के बदले उनसे उम्मीदें मत रखो,
नादान! तुम्हें उनकी असलियत नहीं मालूम,
नेता जी भाषण में प्रेम का दावा करते हैं,
उन जईफों से जिनकी सूरत नहीं मालूम,
चुनाव जीत गए न सोचो कि फिर आयेंगे,
क्या तुम्हें भी उनकी फितरत नहीं मालूम,
पिछले सत्तर सालों से मेरे इस मुल्क में हैं,
जनतन्त्र या षड्यंत्र की हुकूमत नहीं मालूम|
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